Wednesday, April 30, 2014

थोड़ा रूमानी सा ये एहसास ... !! :)

"तकिये के लिहाफ में ,
 बसी तेरी खुशबु....
 तेरे न होने पर भी 
 तेरे होने का
 एहसास दिला जाती हैं।   

सुबह ,चाय के कप से 
उड़ते गर्म फ़ाहे .... 
तेरी आँखों में बसी 
बदमाशियों का,
अंदाज़ बयां कर जाती हैं। 

तेरे न रहने पर भी ,
तेरे  क़दमों की आहट का 
एक नरम सा एहसास.... 
पर्दों में लटकी नन्ही घंटियों 
की आवाज़ करा जाती है। 

कुछ ऐसी ही होती हैं , 
दिल से जुड़े रिश्तों की ज़ुबाँ... 
दूरियों में भी , 
एक खूबसूरत से बंधन का,
एहसास करा जाती हैं। "

नंदिता ( ३०/०४/२०१४ ) 



Monday, April 28, 2014

Tapestry of Life..!!



Random thoughts..
inked pen..
weaving beautiful tapestry
of words, Oh! so beautiful...
of past and present...
of eras gone by ...!!

Random thoughts...
breeze by..
stroke the cheeks,
and the curls lazing around
beneath the ear..
whispering to them,
anecdotes long forgotten...
Etched, Oh! so clearly
in the heart & the soul..!!

Random Thoughts..
amalgamate together..
create history,
of a Soul's journey..!!

And as the words churn,
I become,
An Alchemist
of my own
Random thoughts...!!!

~ Nandita ( 28/04/14)


Monday, July 1, 2013

Haan , Itni si shikayat hai tumse..!!

महादेव ,
एक छोटी सी शिकायत है तुमसे ..

तुम थे ,
पर्वत, नदी,पेड़,धरा में विलुप्त ..
अविकल सी इस झील में सुप्त ,
अडिग अचल अवस्था में लुप्त  
कभी जाने पहचाने से,कभी गुप्त ..!!

 और नादाँ  मैं ,
 चीर स्थितियाँ विक्षिप्त ..  
 मूक बधिर पाषाण सम
 खड़े तुम में,  हो आसक्त..
 अविरल, ढूँढती रही अपना तत्त्व ..। 


 देव ,  
 तुम स्वयं में आधीन , लिप्त ..
 अपने देवत्त्व के इस घनत्त्व से ,
 धूमिल करते जा रहे हो मेरा अस्तित्व ..।। 

 हाँ ,
 बस, इतनी सी शिकायत है तुमसे ..!

 ~ नंदिता ( अभी - अभी-  6:15 pm )
 1/07/2013.



Sunday, June 9, 2013

Prem Fakira..!!

मैं इक आज़ाद ,
उन्मुक्त पवन ..
बहती रही मदमस्त 
धरा हो या फिर हो गगन ..

बेफिक्र नदी सी  
अठखेलियाँ खेलती
उछलती फुदकती 
बहती रही ..
छन छन , छन छन।

प्रेम फकीरा ..
पर ,तुम्हारी दीं 
इन उपाधियों के बंधन 
में तो तप रही है
मेरी प्रेम अगन .. ।। 

फिर क्यों ,
अपने इस फ़कीरी बंधन 
का दे रहे हो आज मुझे 
दोष , ऐसा सघन ..।। 


गर प्रीत का
करते नहीं तुम हनन 
गर,
बाँध लेते साहिल एक 
बाहों का अपनी , चौघन ..। 

देख लेते तुम भी ..
तूफानी, तब ये 
जलधर घनन,  
सिमट जाता कैसे ,
बाहों में तुम्हारी  
बनके इक ठहराव गहन ...।। ..

प्रेम फ़कीरा .. 
जाने दो ,
न कर पाओगे तुम    
ये प्रीत  सघन ..। 

रहने दो,
मुझे यूँ ही 
बनके प्रेम जोगन ..!!..

- नंदिता 

09/06/13.


Friday, February 22, 2013

"तेरे संग होने का तज़र्रबा ,
 इक नन्हा, मौजिज़ा इतेहफाक़ था ...। 

 तेरे, न होने की खलिश.. 
 ता उम्र साथ चलती रही ...।।"

~ नंदिता (21/02/13) 

English Translation: 

"The experience of being with you..
 was a small miraculous co-incidence..!

The vacuum, that your absence creates,
walks beside me, all through my life..!!