Thursday, March 8, 2012

ओ! जादूगर रंगरेजन... !!


ओ! जादूगर रंगरेजन                        
रंग दीजो मोरी ऐसी पैराहन 

कान्हा प्रीत के रंग मा 
मैं रंग जाऊं ऐसो रंग,
पहन उसे इठलाऊँ मैं
खिल जाये मोरी चितवन..
ओ! जादूगर रंगरेजन 
रंग दीजो मोरी ऐसी पैराहन... !

केसरिया हो उसमें ऐसा,
छलकाए मीरा का दीवानापन..
भर दो लाल उसमें ऐसा सुर्ख ,
महकाए जो राधा की अगन ..!
पहन उसे यूँ झूम जाऊं मैं ,
सुनी हो जैसे बांसुरी कि धुन ..!

ओ ! रंगरेजन  रंग दीजो ,
एक छींट हरी सी, पीली सी भी ,
जैसे हरित वसुधा हो ढक जाये, 
सरसों की महकती चादर तन..!
पहन उसे यूँ इतरा जाऊं मैं ,जैसे
राधा कि चूड़ी ने की हो खन-खन ..
हाँ, एक गुलाबी लहरिया भी
जैसे, राधा हो लजाई ..
सुन नाम पिया का मोहन..! 
ओ जादूगर रंगरेजन 
रंग दीजो मोहे ऐसी पैराहन.. !!

ओ! जादूगर रंगरेजन ,
गेसू मोरे हैं कारे घन
भर दो चुनरी में ऐसो रंग..
लहराऊँ उसे जब वन-उपवन
लगे जैसे मयूरों का नर्तन
हो देख, सघन मेघों को, मगन..!


ओ ! जादूगर रंगरेजन 
छेड़ो रंगों का ऐसा सम्मोहन
सुध-बुध बिसरा जाये मोरी..
हो प्रीत विवश मैं बन जाऊं 
अपने प्रियतम की जोगन..!

ओ! जादूगर रंगरेजन 
रंग दीजो मोरी ऐसी पैराहन ..


ओ! जादूगर रंगरेजन 
किस रंग मेरी प्रीत रंगी
ये तोसे का बतलाऊँ..
श्याम नाम जप ऐसी खोई
आपहि श्यामल हो जाऊं..!
ओ! जादूगर रंगरेजन 
रंग दीजो मोरी ऐसी पैराहन ..!!

ओ! जादूगर रंगरेजन 
रंगों के इस मायजाल में
तोसे काहे लागी ऐसी लगन...
खुद श्यामल हो समझी मैं ,
तू ही है कान्हा, तू ही मोहन..!

ओ जादूगर रंगरेजन 
मैं बावरी,  हुई मगन ..
पहन आज, ये पैराहन ..!!

   - नंदिता . ( २/३/२०१२ )  

Wednesday, January 25, 2012

चेहरा - 1

सुबह कि धूप का एक पुलिंदा ..
जब गिरता है तेरे चेहरे पर.. ..
मिचमिचाती आँखों के बीच ..
मासूम से इस चेहरे पर 
खिल जाती तब , अद्भुद  एक मुस्कराहट  ...
दीप्तमई  कर देती है  वो , स्याह सी 
मेरी इस ज़िन्दगी के अंधियारे को ...!

हर रोज़ ,
रात के  साए में लिपटे ,
अनसुलझी सी पहेली से ,
मेरी परछाई के ये क्षण ..
घुलते - मिलते..,उधड़ते -बुनते 
ये  पल ..
इंतज़ार मैं बैठे रहते  हैं , 
फिर एक और सुबह का..
जब धूप का एक पुलिंदा ,
आ बैठेगा फिर तेरे चेहरे पर  ..

तेरी इस मासूम सी हंसीं से ,फिर खिल उठेगा जहाँ मेरा ..
तेरे अक्स में छुपा है कहीं ... मेरा खोया अक्स भी ..
तुझे  शायद पता नहीं ..
मुझसे वो,
अलहदा हो बैठा था जो नूर मेरा ..
आज,
तेरे चेहरे पर फैली इस मुस्कान से ,
फिर रौशन कर रहा है जहाँ मेरा ...!!

नंदिता ( 25/01/12)

Monday, December 19, 2011

उफ़! ये दिल्ली कि सर्दी ...!!!


कोहरे से खेली आज जब छुपन छुपाई ..
साड्डी गड्डी ने भी ऐंठ दिखाई ..
DND Flyway में कुछ ऐसे इतराई 
लगा बादलों में हो रही  है फिसलम फिसलाई ..!

ये देख बचपन कि हमें बहुत याद आई ,
जब कोहरा होता था , परियों कि रज़ाई ..
क्षण भर को इक नन्ही परी , मेरे अन्दर भी इठलाई..!

पर तभी steering wheel ने ऐसी swing दिखाई..
और एक झटके में यथार्थ ने , दिमाग में दस्तक लगाई..
हाय ! तब  दिल्ली कि इस सर्दी को दी हमने राम दुहाई ..!

साड्डी गड्डी को भी हमने डांट लगाई ..  
तुम्हारी इन अठखेलियों से मेरी जान पर बन आई..!!
कोहरे से भी हमने तब मिन्नत लगाई .. 
ना करो इस सर्दी में ऐसी छुप्पन छुपाई..!!
- नंदिता ( १९/१२/२०११ )

Thursday, December 15, 2011

Happy Birthday!...Delhi..


मेरे नज़रिए से देखो तो, बड़ी दिलवाली है ये दिल्ली.. .

कुछ असमंजस , कुछ हौसलों से भरे .
रखे मैने कदम थे जहाँ,  वो शहर था दिल्ली.. 
खाली थे हाथ , बस खवाबों से भरी थी झोली मेरी ,
लिया मुझे हाथों हाथ ..जिस शहर ने , वो शहर था दिल्ली ,
चुन चुनकर बुने ख्वाब मैंने जिसमें  ..
वो सिलाई थी  दिलाई जिसने , उस शहर का नाम था दिल्ली !

मैंने तो बस चाहा था इक छोटा सा घरौंदा अपना ..
जिसने अपने दिल को ही नहीं ,
दुनिया को बना दिया आशियाँ मेरा ,
उस शहर का नाम था दिल्ली .. !

मेरी नज़र से देखो तो .. दिल वालों कि है ये दिल्ली ..
हर शक्श जो आया यहाँ ,उसके खाव्बों का अरमान है ये दिल्ली !

नहीं बन रहे हम एवैयीं शेखचिल्ली ..
कहे कोई तुझे कुछ भी ,
तुझ पर हम हैं कुर्बान, ऐ! दिल्ली ..!!
दिया तूने बहुत कुछ ,तेरे शुक्रान है ऐ! दिल्ली ..
मेरी नज़र से देखो तो , मेरी जान है ये दिल्ली ..!!
नंदिता (१५/१२/२०११ )

Friday, December 2, 2011

उम्मीद -1


उम्मीद -1

उम्मीद से जब हम रूबरू हुए ..
बड़ी बेआबरू सी ज़िन्दगी में,
मानो कुछ हलचल सी हुई ..!!

मायूस सी इस इन अंखियों में ,
उम्मीद की रौशनी जब प्रफुल्लित हुई ..!
दिप्त्मायी हो उठा तब वो जग मेरा ,
काली निशा भी नयनो में, काजल बन सजी ..!

इस नूर-ए-चश्म से हम बागी क्यों थे ..
आज हमें ये हैरानी सी हुई ..!
तेरे इस नूरानी एहसास ने ,
एक नयी तहरीर  लिखी ..

ज़िन्दगी से बाबस्ता हम फिर हुए ,
अंतर्मन में बसी  कशमकश ख़त्म हुई !

उम्मीद तुझ से आज जब हम रूबरू हुए ..
ज़िन्दगी फिर से मेरी रौशन  हुई ..!!

नंदिता (२/१२/२०११ )



Thursday, December 1, 2011

KHAMOSHI - 5


ख़ामोशी - ५ 

तुम ख़ामोशी के सीरे को थामे  ..
अपनी बात बयां करते रहे ..
नादाँ हम, शब्दों के इस मंथन में 
यूँ ही तुम्हारी बाट जोहते रहे ..!! 

नासमझी का ये सिलसिला यूँ ही चलता रहा ,
नाउम्मीद से ये  फासले और बड़ते गए ..!

तेरे मेरे दरमियाँ, 
अधूरे से वो जो ख्वाब थे; बुनते गए ,उधड़ते गए ..! 
रह गया पीछे , खामोश सा ,एक दर्द भरा रिश्ता, 
क्यों नहीं उससे भी, हम बिछुड़ से गए..!
क्यों बार बार तुम और मैं ,
इस दर्द कि तासीर से उलझते गए , जुड़ते गए ..!!

तुम खामोशी से , अपनी बात बयां करते रहे ,
नादाँ हम, शब्दों में तुम्हारी बाट जोहते रहे ...!!
नंदिता (१/१२/२०११ )


Tuesday, November 22, 2011

ख़ामोशी Series - 4


ख़ामोशी -४ 

खिला था इक चमनाज़ार, दिलकश और मुन्नकश..
गुलज़ार थी जिसमे , इक मज़ाहर - ऐ - उल्फत ...!
आया इक तूफाँ , कुछ ऐसा ना जाने क्यों बहकर ,
भर दी जिसने दिल में , शिकवा और शिकायत ...
बड़ गए फिर फासले , 
बिछ गई, गिला ऐ फलसफों कि सतावत ..!!

इस गुलिस्ताँ ऐ उल्फत में है सब्त ,
तेरी ये मुतल -कुलहुक्म खामोशी....!
दामन ऐ दहार में जिसे ,
नवाज़ी है हमने बहुत अक़ीदत ..  !!

अब ज़िद  है हमें भी ,कभी तो कहोगे तुम भी ,
शुक्रान ऐ मुहब्बत, है तेरी ही ये नियामत ...!

यूँ ही नहीं बने हैं हम , तेरी ख़ामोशी कि आदत ..
होगा कभी तो तुम्हें  भी , इक एहसास ऐ मुक़द्दस ,
आखिर,
ये सादिक़ ऐ उल्फत ही दिखा सकती है ऐसी अज़ामत...!!  

-नंदिता ( २१/११/११ )

word meanings :
( अज़ामत -  greatness , सादिक़ - ऐ -उल्फत -  true love   , मुक़द्दस -  sacred , अक़ीदत - respect  , दामन ऐ दहार -  on the face of this world  , मुतल - कुलहुक्म-  arrogant , सब्त -  etched , फलसफों - philosophies  , सतावत - grandeur  , मज़ाहर ऐ उल्फत - symbol of love    , चमनाज़ार- garden  , मुनाक्कश - picturesque )