Thursday, January 30, 2014
Tuesday, September 17, 2013
Monday, July 1, 2013
Haan , Itni si shikayat hai tumse..!!
महादेव ,
एक छोटी सी शिकायत है तुमसे ..
तुम थे ,
पर्वत, नदी,पेड़,धरा में विलुप्त ..
अविकल सी इस झील में सुप्त ,
अडिग अचल अवस्था में लुप्त
कभी जाने पहचाने से,कभी गुप्त ..!!
और नादाँ मैं ,
चीर स्थितियाँ विक्षिप्त ..
मूक बधिर पाषाण सम
खड़े तुम में, हो आसक्त..
अविरल, ढूँढती रही अपना तत्त्व ..।
Sunday, June 9, 2013
Prem Fakira..!!
मैं इक आज़ाद ,
उन्मुक्त पवन ..
बहती रही मदमस्त
धरा हो या फिर हो गगन ..
बेफिक्र नदी सी
अठखेलियाँ खेलती
उछलती फुदकती
बहती रही ..
छन छन , छन छन।
प्रेम फकीरा ..
पर ,तुम्हारी दीं
इन उपाधियों के बंधन
में तो तप रही है
मेरी प्रेम अगन .. ।।
फिर क्यों ,
अपने इस फ़कीरी बंधन
का दे रहे हो आज मुझे
दोष , ऐसा सघन ..।।
गर प्रीत का
करते नहीं तुम हनन
गर,
बाँध लेते साहिल एक
बाहों का अपनी , चौघन ..।
देख लेते तुम भी ..
तूफानी, तब ये
जलधर घनन,
सिमट जाता कैसे ,
बाहों में तुम्हारी
बनके इक ठहराव गहन ...।। ..
प्रेम फ़कीरा ..
जाने दो ,
न कर पाओगे तुम
ये प्रीत सघन ..।
रहने दो,
मुझे यूँ ही
बनके प्रेम जोगन ..!!..
- नंदिता
Tuesday, November 27, 2012
"कुछ कुछ रूमानी सी ...
कुछ कुछ रूहानी सी ..
नज़्म, ये तेरी-मेरी
गा रही है ज़िन्दगी ..!!"
वो हर्फ़ जो गले में
रुंधे पड़े हुए थे कई ..
आज उन्हें आवाज़,
दिला रही है ज़िन्दगी ..।
हाँ , तेरा मेरा गीत
गुनगुना रही है ज़िन्दगी ...।।
वक़्त की बंदिश में
एक लम्हा,
जो खो गया था कभी
उस लम्हे को सोज़
बना रही है ज़िन्दगी ..।।
हाँ ,
एक नयी सरगम
गुनगुना रही है ज़िन्दगी।।
तेरी यादें जो महफूज़ थीं
इक संदूक में कहीं ..
उन्हें खुली हवा में
सहला रही है ज़िन्दगी ..।
उनकी आज़ादी का जश्न
मना रही है ज़िन्दगी .. ।।
कुछ कुछ रूमानी सी
कुछ कुछ रूहानी सी ,
हाँ , तुझे मुझे ..
इक सुफिआना रक्स में ,
झुमा रही है ज़िन्दगी ...।।
~ नंदिता ( 27/11/12)
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